Thursday, February 17, 2011

!! रिन्दगी से जिन्दगी !!

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एक रिन्द को गैरत हुयी
अँधेरे की ख्वाइश थी उसकी,
और जुगनू
देख लिया उसने  !

कई बलाओं की
हवेली का मालिक था,
स्वाँग बला का,कैसे भी चलता
चलाता था वह ,
जियादती हुयी एक दिन,
किसी इल्मी चराग ने
उसके किवाड़ पे आहट की,
और किवाड़
खोल दिया उसने  !


हर नजर ,हर धड़कन
शराबी थी,
वजह,उससे दूर
उसके दिल की पैराहन
गुलाबी थी,
उससे अच्छाई, सच के प्याले का
तकाजा करने आती थी,
हर बार ,वह टिकाऊ दिखा,
एक दिन मैकशी में
भूल हो गयी
और  प्याला
उठा लिया उसने  !


वह राजी नही था
अपनी रिन्दगी से,
एक लहजे में
खुद ही खुद को
जलाता बुझाता  रहता था
एक दिन मुंडेर पे बैठा  एक पंछी बोला
‘अब अँधेरा ही रहेगा ‘
चुपके से
उसने ख्वाइश बदल दी
जुगनू से दिल लगा
और अँधेरा
छोड़ दिया उसने  !!

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