Thursday, April 28, 2011

जाने क्या सोचा था...




जाने     क्या   सोचा   था ,   'क्या  मुकाम   देखेंगे'
हज़ार
    काम   हों  पर   तेरा  इन्तजाम  देखेंगे !!

बुझ
     गयी    वो   लौ ,   लौ  तुमने   फूँक   दी
जिन्दगी
  क्या  , अब   कफ़न  में  कयाम    देखेंगे !!

  
तेरी     जिद   पे   किनारे   खड़े खड़े   ही  रहे
अब
   आंसुओं   में    शरीक   हर  शाम  देखेंगे !! 

 
हँसी    ख़ुशी   इक    लहजा  ,   लहजे   का  क्या
जाम
-- ख़ुशी  में तुम ,हम जहर का जाम देखेंगे !! 

 
गवाँ    दिया   सब   तेरे   पीछे   बे -इन्तहां  होकर
बदले
   में     मिला जख्म   का    इनाम    देखेंगे !! 

 
ये    और    बात   है हमें     वफ़ा      मिली
हर
     जर्रे  में  मगर तेरा    ही   नाम   देखेंगे !! 

 
दौलत   पूछो   गीत  गजल  के  सिवा  कुछ नही
 इश्क  बाजारी  में 'हातिफ' ,इस  गजल का दाम
देखेंगे !!
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                                                         -  RITIK HATIF

Monday, April 25, 2011

काश मेरी हो तेरी ये मूरत





तुमको ही जाने,तुम्हे पहचाने
मेरा    वुजूद   को   जाना है ?
तेरी   ही   गलियाँ, तेरे दीवाने
तेरी   वजह   से   मैखाना  है !

तेरे   हुस्न   पे   दुनिया  नाचै,
जिसको  देखो  गुन तेरा बाचै,
हम तो भी अब लिखने लगे हैं
गान  भी  तेरा  करने  लगे हैं !

तेरे फिकर में  हम हुए आधा,
इस   श्याम   की  तू है  राधा,
तू  चन्दा  हम   सितार  हुए हैं
तेरी  यादों के बाज़ार  हुए हैं ! 

उफ़   ये  तेरी आँखें  समंदर ,
होता  नहीं  पर डूबने का डर,
डूब   गया  तो  मेरी किस्मत
काश  मेरी हो तेरी ये मूरत !!

 
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                                             -RITIK 'HATIF'

Tuesday, April 19, 2011

B Tech के चार साल





हर    आँसू    हर   हाल  , तेरे पीछे
B Tech  के चार साल , तेरे पीछे !!

पढ़ने       के     दौर      का     क्या
टीचर्स  से हुआ बवाल  ,तेरे पीछे !!

लैब      प्रोग्राम्स        की      तरह
बनते    हैं  सवाल   ,   तेरे  पीछे !!

न्यूटन है मिसाल तो क्या मै कम हूँ
निकम्मों  में  मै  मिसाल तेरे पीछे !!



कहाँ      कहाँ      न       गया      मै
स्टैंड , सेमिनार  हाल    तेरे पीछे !!

एन्स्वर   शीट  पे    तेरा  चेहरा और
कलम से निकले गुलाल,तेरे पीछे !!

आज     नही    तो     कल     फँसोगे
बना    हूँ  इक  जाल    तेरे    पीछे !!


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                                                     -रितिक 'हातिफ'

Friday, April 15, 2011

भारत की सर जमी.................!!









कुराँ  की  जुबाँ,  वेदों  की जतन बनी रहे !
भारत की सर जमी ,बनी दुल्हन बनी रहे !!

  क्रोध  बला  पे  खींचा   हो
   
कोई  ऊंचा कोई  नीचा हो 

मन  में  तरंगी   उमंग  रहे
 
और   हिन्द पताका ऊंचा हो
दौलत आनी जानी है, बस मन की कंचन बनी रहे !
भारत  की   सर   जमी ,  बनी दुल्हन  बनी रहे !!


इस पार गयीं, उस पार गयीं
जाने किस किस पार गयीं
आवाज़  उठी  जो  आँगन से
माटी  के  लिए  सौ  बार गयीं
घर  की   तुलशी  , माटी   में  चन्दन  बनी रहे  !
भारत  की  सर  जमी ,बनी  दुल्हन बनी रहे !!

रूठा कोई अपना छूट जाय
छूटा कोई अपना रूठ जाय
सुनी   सुनाई  बातों  से   बस
प्रेम  की  रेशम  टूट  जाय
मत  जुदा  हों पर, दिल की  मिलन  बनी रहे !
भारत  की  सर जमी , बनी  दुल्हन  बनी  रहे
!!

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                                                         -रितिक 'हातिफ'
 

Thursday, February 17, 2011

!! दूर हूँ तुझसे मगर ,तेरा चाहने वाला हूँ !!

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नदी तीर पर कुटी नहीं
दूर रहा मै प्यासा हूँ
बिन पानी प्यास बुझेगी
खुद को देता दिलासा हूँ
तू यहाँ की विदुषी,मै भग्गा तहरीर वाला हूँI
दूर हूँ तुझसे मगर , तेरा चाहने वाला हूँII

करता हूँ प्यार अरसे से
तुम्हे मै बेगाना रख
सहता हूँ ग़मों को यूँ
खुद को परवाना रख
मूक दर्शक हूँ,जुबाँ पे लगाया ताला हूँI
दूर हूँ तुझसे मगर ,तेरा चाहने वाला हूँII

हाथों पे कुछ लकीरें हैं
उनमे मेरे जज्बात नहीं
चाहूं जिसे लाख मै
वो होता मेरे साथ नहीं
तू चाँद की संकाश,मै अँधियारा काला हूँI
दूर हूँ तुझसे मगर , तेरा चाहने वाला हूँII
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खबरदार

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खबरदार
ये खाना जंगी बंद कर
खर्राटे से कोई जग जायेगा
कुछ गालियाँ देगा तुझे
फिर
सो जायेगा
खबरदार
सकते से उठ
कारवें का इन्तजार छोड़
सई कर सही का
कारवाँ
तेरा इन्तजार करेगा.

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!! रिन्दगी से जिन्दगी !!

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एक रिन्द को गैरत हुयी
अँधेरे की ख्वाइश थी उसकी,
और जुगनू
देख लिया उसने  !

कई बलाओं की
हवेली का मालिक था,
स्वाँग बला का,कैसे भी चलता
चलाता था वह ,
जियादती हुयी एक दिन,
किसी इल्मी चराग ने
उसके किवाड़ पे आहट की,
और किवाड़
खोल दिया उसने  !


हर नजर ,हर धड़कन
शराबी थी,
वजह,उससे दूर
उसके दिल की पैराहन
गुलाबी थी,
उससे अच्छाई, सच के प्याले का
तकाजा करने आती थी,
हर बार ,वह टिकाऊ दिखा,
एक दिन मैकशी में
भूल हो गयी
और  प्याला
उठा लिया उसने  !


वह राजी नही था
अपनी रिन्दगी से,
एक लहजे में
खुद ही खुद को
जलाता बुझाता  रहता था
एक दिन मुंडेर पे बैठा  एक पंछी बोला
‘अब अँधेरा ही रहेगा ‘
चुपके से
उसने ख्वाइश बदल दी
जुगनू से दिल लगा
और अँधेरा
छोड़ दिया उसने  !!

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